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भाग-IVA : मूल कर्तव्य (Fundamental Duties)

मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) • मूल कर्तव्य वे नैतिक दायित्व हैं जो भारत के प्रत्येक नागरिक को संविधान द्वारा सौंपे गए हैं। ये नागरिकों को लोकतांत्रिक आचरण और व्यवहार के बुनियादी मानदंडों का पालन करने की याद दिलाते हैं।• मूल कर्तव्यों को संविधान के भाग IV(A) में अनुच्छेद 51A के अंतर्गत रखा गया है।• मूल […]

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भाग-IV : राज्य की नीति के निदेशक तत्व (Directive Principles Of State Policy)

राज्य की नीति के निदेशक तत्व (Directive Principles Of State Policy) राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) को भाग-IV में अनुच्छेद 36 से 51 के बीच रखा गया है। इसे आयरलैंड के संविधान से लिया गया है। आयरलैंड ने यह प्रावधान स्पेन के संविधान से लिया है। DPSP भारतीय राज्य के लिए आदर्शों या निर्देशों

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भाग-III : मूल अधिकार (Fundamental Rights)

मूल अधिकार (Fundamental Rights) • मौलिक अधिकार भारतीय संविधान में निहित वे मूलभूत अधिकार हैं जो भारत के प्रत्येक नागरिक को प्रदान किए गए हैं। ये अधिकार किसी भी व्यक्ति के भौतिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए अपरिहार्य हैं।• मौलिक अधिकारों का वर्णन भारतीय संविधान के भाग III में अनुच्छेद 12 से 35 तक

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भाग-II : नागरिकता (Citizenship)

भाग-II : नागरिकता (Citizenship) • नागरिकता नागरिक और राज्य के बीच एक कानूनी संबंध होता है। कोई भी देश अपने मूल निवासियों को कुछ विशेष अधिकार देता है इन अधिकारों को ही नागरिकता कहा जाता है। बदले में राज्य नागरिकों से सेवा की अपेक्षा रखता है। • भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान है अर्थात्

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भाग-I : संघ एवं इसका क्षेत्र (The Union And Its Territory)

भाग-I : संघ एवं इसका क्षेत्र (The Union And Its Territory) अनुच्छेद 1 :- इंडिया यानी भारत ‘राज्यों का संघ‘ होगा। (India that is Bharat shall be a union of State)। इसका अर्थ यह है कि भारत संघ है, यह विभक्त नहीं हो सकता। पूरा देश एक है जो विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक सुविधा के

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संविधान की अनुसूचियाँ तथा भारतीय संविधान का स्रोत (Schedules of the Constitution and Source of the Indian Constitution)

संविधान की अनुसूचियाँ (Schedules of the Constitution) • भारतीय संविधान में मूलतः 8 अनुसूची ही थी परंतु वर्तमान में इसकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है। प्रथम अनुसूची (अनुच्छेद 1 एवं 4) • इसमें राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्र की चर्चा है। दूसरी अनुसूची (अनुच्छेद 59, 65, 75, 97, 125, 148, 158, 164, 186 एवं

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संविधान की प्रस्तावना (Preamble to the Constitution)

संविधान की प्रस्तावना (Preamble to the Constitution) • संविधान के परिचय अथवा भूमिका को प्रस्तावना कहते हैं। इसमें संविधान का सार होता है।• सर्वप्रथम अमेरिकी संविधान में प्रस्तावना को सम्मिलित किया गया था।• एन.ए. पालकीवाला ने प्रस्तावना को ‘संविधान का परिचय पत्र’ कहा है।• भारतीय संविधान की प्रस्तावना पंडित नेहरू द्वारा बनाए और पेश किए

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संविधान की प्रमुख विशेषताएँ (Salient Features of the Constitution)

संविधान की प्रमुख विशेषताएँ (Salient Features of the Constitution) • संविधान में कई बड़े परिवर्तन करने वाले 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 को ‘मिनी कॉन्स्टिट्यूशन’ कहा जाता है।• सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती मामले (1973) में यह व्यवस्था दी थी कि अनुच्छेद 368 के तहत संसद को मिली संवैधानिक शक्ति संविधान के ‘मूल ढांचे’ को

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संविधान सभा (The Constituent Assembly)

संविधान सभा (The Constituent Assembly) • भारत के लिए संविधान की मांग सर्वप्रथम 1895 में बालगंगाधर तिलक के द्वारा किया गया।• 1922 में महात्मा गांधी ने यह इच्छा जाहिर किया कि भारतीय संविधान का निर्माण भारतीयों की इच्छानुसार किया जायेगा।• भारत में संविधान सभा के गठन का विचार वर्ष 1934 में पहली बार एम. एन.

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भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical background of the Indian Constitution)

संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि • 1600 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई। इस समय ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम थी जिन्होंने ब्रिटिश कंपनी को भारत के साथ व्यापार करने का अधिकार दी। कंपनी के स्थापना के समय मुगल बादशाह अकबर था। कंपनी भारत में अपना व्यापार प्रारंभ जहाँगीर के शासनकाल में किया। ब्रिटिश

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