BSEB Class 10th संस्कृत अध्याय 9 “स्वामी दयानन्द:”

BSEB Class 10th Sanskrit : प्रिय विद्यार्थियों, “Mindbloom Study” (#1 Online Study Portal) आपके लिए लाया है Class 10th संस्कृत अध्याय 9 “स्वामी दयानन्द:” का Objective & Subjective Answer Questions

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)

1. स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म कहाँ हुआ था? 
(A) अहमदाबाद 
(B) टंकारा ग्राम, गुजरात 
(C) सुरेन्द्रनगर 
(D) अजमेर 

2. स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म किस वर्ष हुआ था? 
(A) 1805 ई० 
(B) 1814 ई० 
(C) 1824 ई० 
(D) 1834 ई०

3. स्वामी दयानंद सरस्वती की मृत्यु कब हुई? 
(A) 1875 ई० 
(B) 1883 ई० 
(C) 1890 ई० 
(D) 1901 ई०

4. स्वामी दयानंद ने किस समाज की स्थापना की? 
(A) ब्राह्म समाज 
(B) प्रार्थना समाज 
(C) आर्य समाज 
(D) थियोसोफिकल सोसायटी

5. स्वामी दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना कब की? 
(A) 1865 ई० 
(B) 1875 ई० 
(C) 1885 ई० 
(D) 1895 ई०

6. स्वामी दयानंद सरस्वती कौन थे? 
(A) सैनिक 
(B) समाज सुधारक 
(C) चित्रकार 
(D) वैज्ञानिक 

7. स्वामी दयानंद के गुरु कौन थे? 
(A) रामकृष्ण परमहंस 
(B) विवेकानंद 
(C) विरजानन्द 
(D) दादाभाई नैोरोजी

8. स्वामी दयानंद किस शताब्दी में जन्मे थे ? 
(A) 17वीं शताब्दी
(B) 18वीं शताब्दी 
(C) 19वीं शताब्दी 
(D) 20वीं शताब्दी

9. स्वामी दयानंद की शिक्षा किस भाषा से आरंभ हुई? 
(A) हिंदी 
(B) अंग्रेज़ी 
(C) संस्कृत 
(D) उर्दू

10. स्वामी दयानंद को उपदेश किसने दिए थे? 
(A) दयानंद के पिता ने 
(B) विरजानन्द ने 
(C) दादाभाई नैोरोजी ने 
(D) लोकमान्य तिलक ने

11. ‘स्वामी दयानंद’ पाठ किस प्रकार का है? 
(A) कविता 
(B) नाटक 
(C) निबंध 
(D) संवाद

12. स्वामी दयानंद किसके संस्थापक हैं? 
(A) डी०ए०वी० महाविद्यालय 
(B) ब्रह्म समाज 
(C) आर्य समाज 
(D) कांग्रेस

13. ‘सत्यार्थ प्रकाश’ किसकी रचना है? 
(A) महात्मा गांधी 
(B) स्वामी दयानंद सरस्वती 
(C) राजा राममोहन राय 
(D) स्वामी विवेकानंद

14. ‘मूल शंकर’ किसका वास्तविक नाम था? 
(A) स्वामी दयानंद सरस्वती का 
(B) स्वामी विवेकानंद का 
(C) रामकृष्ण परमहंस का 
(D) दयानंद के पिता का

15. स्वामी दयानंद का जन्म किस प्रकार के परिवार में हुआ था? 
(A) किसान परिवार 
(B) कर्मकांडी ब्राह्मण परिवार 
(C) व्यापारी परिवार 
(D) शासक परिवार

16. स्वामी दयानंद का परिवार किस भगवान के उपासक थे? 
(A) भगवान विष्णु 
(B) भगवान शिव 
(C) भगवान राम 
(D) भगवान कृष्ण

17. मूर्ति पूजा से विरक्त होकर स्वामी दयानंद ने क्या किया? 
(A) घर छोड़ दिया 
(B) मंदिर बनवाया 
(C) नया आश्रम खोला 
(D) विदेश चले गए

18. दयानंद को उनके गुरु विरजानन्द कहाँ मिले? 
(A) काशी में 
(B) हरिद्वार में 
(C) मथुरा में 
(D) प्रयाग में

19. मध्यकाल में हिन्दू समाज से तिरस्कृत होकर धर्म परिवर्तन कौन कर रहे थे? 
(A) क्षत्रिय लोग 
(B) ब्राह्मण लोग 
(C) दलित लोग 
(D) वैश्य लोग

20. आर्य समाज की स्थापना किस नगर में की गई? 
(A) लाहौर 
(B) कलकत्ता 
(C) बंबई
(D) दिल्ली

21. किस काल में हिन्दू समाज अत्यधिक रूप से दूषित माना गया? 
(A) प्राचीन काल 
(B) मध्य काल 
(C) आधुनिक काल 
(D) उत्तर-वैदिक काल

22. 1875 ई० में किसकी स्थापना हुई? 
(A) ब्रह्म समाज
(B) आर्य समाज 
(C) कांग्रेस 
(D) डी०ए०वी० ट्रस्ट

23. स्वामी दयानंद ने किसका प्रचार-प्रसार किया? 
(A) मूर्ति पूजा का 
(B) तंत्र-मंत्र का 
(C) वेदों के शुद्ध ज्ञान का 
(D) केवल भक्ति मार्ग का

24. समाज और शिक्षा के उद्धारक के रूप में किसे जाना जाता है?
(A) राजा राममोहन राय 
(B) ईश्वरचंद्र विद्यासागर 
(C) स्वामी दयानंद सरस्वती 
(D) महात्मा गांधी

25. मध्य काल में मुख्यतः किसका आडंबर बढ़ गया था? 
(A) कृषि कार्य का 
(B) धार्मिक कार्यों का 
(C) व्यापार का 
(D) सैनिक कार्यों का

26. पाठ के अनुसार कौन अत्यंत मेधावी थे?
(A) दयानंद के पिता 
(B) दयानंद के गुरु 
(C) स्वामी दयानंद 
(D) महात्मा हंसराज

27. किसकी शाखाएँ देश–विदेश में फैली हुई हैं? 
(A) ब्रह्म समाज की 
(B) आर्य समाज की 
(C) कांग्रेस की 
(D) थियोसोफिकल सोसायटी की

28. शिवरात्रि की रात मंदिर में रखे प्रसाद को कौन खा रहा था, जिसे देखकर दयानंद को झटका लगा? 
(A) बिल्ली 
(B) चूहा 
(C) कुत्ता 
(D) पक्षी

29. स्वामी दयानंद के लिए कौन-सा पर्व विशेष रूप से उद्बोधक (जागृति का कारण) बना? 
(A) जन्माष्टमी 
(B) रामनवमी 
(C) शिवरात्रि 
(D) दीपावली

30. डी०ए०वी० विद्यालयों की स्थापना किसने की? 
(A) स्वामी दयानंद ने 
(B) स्वामी दयानंद के अनुयायियों ने
(C) महात्मा गांधी ने 
(D) राजा राममोहन राय ने

31. ‘मूल शंकर’ को मूर्ति पूजा के प्रति अनास्था होने के दूसरे वर्ष में किसका निधन हो गया था ? 
(A) माता का 
(B) पिता का 
(C) बहन का 
(D) गुरु का

विषयनिष्ठ प्रश्न (Subjective Answer Questions)

1. मध्यकाल में भारतीय समाज क्यों दूषित हो गया था?
उत्तर — मध्यकाल में भारतीय समाज में अनेक कुरीतियाँ; जैसे जातिवाद, छुआ-छूत, बाल-विवाह, धार्मिक कार्यों में आडंबर, स्त्रियों के लिए शिक्षा की कमी, विधवाओं की निंदनीय स्थिति और शिक्षा की अव्यापकता आदि व्याप्त थी। इन सभी के कारण, मध्यकाल में भारतीय समाज दूषित हो गया था।

2. मध्यकाल में भारतीय समाज में वर्तमान कुरीतियों पर प्रकाश डालें।
उत्तर — मध्यकाल में भारतीय समाज में अनेक कुरीतियाँ व्याप्त थी, जैसे जातिवाद, छुआ-छूत, बाल-विवाह, धार्मिक कार्यों में आडंबर, स्त्रियों के लिए शिक्षा की कमी, विधवाओं की निंदनीय स्थिति और शिक्षा की अव्यापकता आदि। इसके कारण अनेक दलितों ने हिंदू समाज को अस्वीकार कर दुसरे धर्म को अपना लिया।

3. प्राचीन समाज में कौन-कौन से प्रमुख दोष थे?
उत्तर — मध्यकाल में भारतीय समाज अनेक गलत रीति-रिवाजों के कारण दूषित हो गया था। प्राचीन समाज में जाति-आधारित असमानता, अस्पृश्यता, धार्मिक कार्यों में आडंबर, स्त्रियों के लिए शिक्षा की कमी, विधवाओं की निंदनीय स्थिति और शिक्षा की अव्यापकता जैसे कई प्रमुख दोष थे। इसके कारण ही अनेक दलितों ने हिंदू समाज को अस्वीकार कर धर्मांतरण स्वीकार कर लिया।

4. स्वामी दयानंद कौन थे? समाज सुधार के लिए उन्होंने क्या किया?
उत्तर — स्वामी दयानंद एक महान समाज-सुधारक सन्त थे। इनका जन्म 1824 में गुजरात के ‘टंकारा’ नामक गांव के एक कर्मकाण्डी परिवार में हुआ था। इन्होंने विभिन्न समाज-सुधारकों के साथ मिलकर स्त्री शिक्षा, विधवा विवाह, मूर्तिपूजा के खंडन, अस्पृश्यता और बाल-विवाह निवारण के लिए अत्यधिक प्रयत्न किया। पुरातन शिक्षा पद्धति के दोषों को उजागर कर नवीन शिक्षा पद्धति का सुझाव दिया। अपने सिद्धांतों को लोगों के बीच पहुँचाने के लिए ‘आर्यसमाज’ की स्थापना की। वेदों का ज्ञान आम जनमानस को भी हो, इसके लिए वेदों के भाष्यों को संस्कृत और हिन्दी दोनों भाषाओं में लिखा। उन्होंने हमेशा धार्मिक आडंबरों का विरोध किया और अपना जीवन वैदिक धर्म के प्रचार और प्रसार के लिए समर्पित कर दिया।

5. समाज के उन्नयन में स्वामी दयानंद के योगदानों पर प्रकाश डालें।
उत्तर — समाज के उन्नयन में स्वामी दयानंद का अनेक योगदान रहा है। उन्होंने मध्यकाल में भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के उद्देश्य से स्त्री शिक्षा, विधवा विवाह, मूर्तिपूजा खंडन और बाल-विवाह को रोकने, आदि का प्रयत्न किया। इसके लिए उन्होंने 1875 में ‘आर्यसमाज’ की स्थापना की। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को भी सुधारने का प्रयास किया। उन्होंने हमेशा धार्मिक आडंबरों का विरोध किया और अपना जीवन वैदिक धर्म के प्रचार और सत्य के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया।

6. अपने किन गुणों के कारण उन्नीसवीं सदी के समाज सुधारकों में स्वामी दयानन्द श्रेष्ठ माने जाते है?
उत्तर — विषम परिस्थिति में, उन्नीसवीं सदी के ऐसे कठिन समय में, कुछ धार्मिक पुनरुत्थानवादी, सत्य की खोज करने वाले और समाज की असमानताओं को दूर करने वाले महापुरुष भारतवर्ष में प्रकट हुए। परंतु अपने विचारों की व्यापकता और समाज कल्याण के दृढ़ संकल्प के कारण उन्नीसवीं सदी के समाज सुधारकों में स्वामी दयानन्द श्रेष्ठ माने जाते है।

7. शिवरात्रि महापर्व स्वामी दयानन्द के लिए उद्बोधक हुआ, कैसे?
उत्तर — एक बार शिवरात्रि महापर्व के रात्रि जागरण में स्वामी दयानन्द ने देखा कि चूहे भगवान शिव की मूर्ति पर चढ़कर उनपर चढ़ाए हुए प्रसाद को खा रहे हैं। इससे उन्हें यह विश्वास हो गया कि मूर्ति एक साधारण वस्तु है और मूर्ति में भगवान नहीं होते हैं। वे उसी समय रात्रि-जागरण को छोड़ कर घर चले गए। बाद में, वेदों का अध्ययन कर सत्य और वैदिक धर्म का प्रचार करने लगे। इस प्रकार शिवरात्रि महापर्व स्वामी दयानन्द के लिए उद्बोधक हुआ।

8. स्वामी दयानन्द पर रात्रि जागरण का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर — एक बार शिवरात्रि महापर्व के रात्रि जागरण में स्वामी दयानन्द ने देखा कि चूहे भगवान शिव की मूर्ति पर चढ़कर उनपर चढ़ाए हुए प्रसाद को खा रहे हैं। इससे उन्हें यह विश्वास हो गया कि मूर्ति एक साधारण वस्तु है और वास्तव में, मूर्ति में भगवान नहीं होते हैं। वे उसी समय रात्रि जागरण को छोड़ कर घर चले गए। इस घटना का स्वामी दयानन्द पर यह प्रभाव पड़ा कि उनके मन में मूर्ति पूजा के प्रति कोई आस्था नहीं रही और वे मूर्ति पूजा के विरोधी बन गए।

9. स्वामी दयानंद को मूर्तिपूजा के प्रति अनास्था कैसे हुई?
उत्तर — स्वामी दयानंद का परिवार शिवोपासक था। उनके परिवार में शिवरात्रि का पर्व बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता था। एक बार शिवरात्रि पर्व की रात्रि जागरण के समय दयानंद ने देखा कि चूहे भगवान शिव के विग्रह पर चढ़ कर विग्रह को अर्पित नैवेद्य को खा कर रहे हैं। इससे उन्हें यह विश्वास हो गया कि मूर्ति एक साधारण वस्तु है और वास्तव में, मूर्ति में भगवान नहीं होते हैं। दयानंद उसी समय रात्रि जागरण को छोड़कर घर चले गये और तभी से उनके मन में मूर्ति पूजा के प्रति अनास्था उत्पन्न हो गई।

10. स्वामी दयानंद मूर्तिपूजा के विरोधी कैसे बने ?
उत्तर — स्वामी दयानंद का परिवार शिवोपासक था। उनके परिवार में शिवरात्रि का पर्व बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता था। एक बार शिवरात्रि के रात्रि-जागरण के समय दयानंद ने देखा कि भगवान शिव के विग्रह पर चढ़ाए गए प्रसाद को मूषक खा कर रहा है। तब उन्होंने सोचा कि मूर्ति में अगर भगवान होते तो वे चूहे को जरूर भगाते। उनके समझ में आ गया कि मूर्ति में भगवान नहीं होते हैं। वे उसी समय रात्रि जागरण को छोड़ कर घर चले गए। इस घटना का स्वामी दयानन्द पर यह प्रभाव पड़ा कि उनके मन में मूर्ति पूजा के प्रति कोई आस्था नहीं रही और वे मूर्ति पूजा के विरोधी बन गए।

11. मूलशंकर में वैराग्य भाव कब उत्पन्न हुआ ?
उत्तर — शिवरात्रि महापर्व के रात्रि जागरण में चूहे को भगवान शिव की मूर्ति पर चढ़कर उनपर चढ़ाए हुए प्रसाद को खाते देखकर मूलशंकर के मन में मूर्ति पूजा के प्रति अनास्था उत्पन्न हुई। उन्हें विश्वास हो गया कि मूर्ति में भगवान नहीं होते हैं। इस घटना के दो वर्ष बाद उनकी प्रिय बहन की मृत्यु हो गई, जिसके बाद मूलशंकर में वैराग्य की भावना उत्पन्न हुई।

12. मूलशंकर में वैराग्य भाव कैसे उत्पन्न हुआ ?
उत्तर — शिवरात्रि महापर्व के रात्रि जागरण में चूहे को भगवान शिव की मूर्ति पर चढ़कर उनपर चढ़ाए हुए प्रसाद को खाते देखकर मूलशंकर के मन में मूर्ति पूजा के प्रति अनास्था उत्पन्न हुई। उन्हें विश्वास हो गया कि मूर्ति में भगवान नहीं होते हैं। इस घटना के दो वर्ष बाद उनकी प्रिय बहन की मृत्यु हो गई, जिसके बाद मूलशंकर में वैराग्य की भावना उत्पन्न हुई।

13. स्वामी दयानंद ने अपने सिद्धांतों के संकलन के लिए क्या किया?
उत्तर — स्वामी दयानंद ने अपने सिद्धांतों के संकलन के लिए ‘सत्यार्थ प्रकाश’ नामक ग्रंथ की रचना हिंदी भाषा में की और अपने अनुयायियों पर उपकार किया। इसके साथ ही वेदों के प्रति सभी धर्म के अनुयायियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए उन्होंने स्वयं वेदों के भाष्यों को संस्कृत और हिन्दी दोनों भाषाओं में लिखे।

14. स्वामी दयानंद की शिक्षा-व्यवस्था का वर्णन करें।
उत्तर — स्वामी दयानंद ने वैदिक धर्म और सत्य के प्रचार में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने सिद्धांतों के संकलन के लिए ‘सत्यार्थ प्रकाश’ नामक ग्रंथ की रचना हिंदी भाषा में की। इसके साथ ही वेदों के प्रति सभी धर्म के अनुयायियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए उन्होंने वेदों के उपदेशों को संस्कृत और हिन्दी दोनों भाषाओं में लिखा। उन्होंने प्राचीन शिक्षा पद्धति को दोषमुक्त करने का प्रयास किया।

15. स्वामी दयानन्द ने समाज की किन कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया?
उत्तर — मध्यकाल में भारत में अनेक कुरीतियाँ फैली हुई थी। जिसके कारण समाज के छोटे और वंचित वर्ग के लोग धर्मपरिवर्तन करने लगे थे। स्वामी दयानंद ने उस समय धार्मिक आडंबरता, अस्पृश्यता, स्त्री-अशिक्षा, विधवाओं की दुर्गति और बाल-विवाह आदि कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने स्त्री शिक्षा, विधवा विवाह, मूर्तिपूजा खंडन और बाल-विवाह निवारण के लिए प्रयत्न किया।

16. स्वामी दयानंद ने वैदिक धर्म को बढ़ावा देने के लिए क्या किया?
उत्तर — स्वामी दयानंद ने वैदिक धर्म को बढ़ावा देने के लिए अपना जीवन वैदिक धर्म के प्रचार और सत्य के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। स्वामी दयानंद ने वेदों के प्रति सभी धर्म के अनुयायियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए स्वयं ही वेदों के भाष्यों को संस्कृत और हिन्दी दोनों भाषाओं में लिखे। उन्होंने छुआ-छूत, मूर्ति-पूजा तथा धार्मिक आडंबरों का पुरजोर विरोध किया जिससे धर्म परिवर्तन की दर में कमी आई।

17. स्वामी दयानन्द एक महान समाज सुधारक थे, कैसे?
उत्तर — मध्यकाल में भारत में अनेक कुरीतियाँ फैली थी, जिससे दलित वर्ग के लोग धर्मांतरण करने लगे। ऐसे कठिन समय में, स्वामी दयानंद ने विभिन्न समाज-सुधारकों के साथ मिलकर स्त्री शिक्षा, विधवा विवाह, मूर्तिपूजा खंडन, छुआ-छूत और बाल-विवाह को रोकने, आदि के लिए अत्यधिक प्रयत्न किया। उन्होंने अपने विचारों को समाज के प्रत्येक वर्ग के लोगों को तक पहुँचाने के लिए ‘आर्यसमाज’ की स्थापना की। वेदों का ज्ञान आम जनमानस को भी हो, इसके लिए वेदों के भाष्यों को संस्कृत और हिन्दी दोनों भाषाओं में लिखा। पुरातन शिक्षा पद्धति के दोषों को उजागर कर नवीन शिक्षा पद्धति का सुझाव दिया। इनके द्वारा किए गए प्रयासों का प्रभाव हमें आज भी देखने को मिलता है। अतः हम कह सकते हैं कि स्वामी दयानन्द एक महान समाज सुधारक थे।

– : समाप्त : –

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