BSEB Class 10th संस्कृत अध्याय 11 “व्याघ्रपथिककथा:”

BSEB Class 10th Sanskrit : प्रिय विद्यार्थियों, “Mindbloom Study” (#1 Online Study Portal) आपके लिए लाया है Class 10th संस्कृत अध्याय 11 “व्याघ्रपथिककथा” का Objective & Subjective Answer Questions

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)

विषयनिष्ठ प्रश्न (Subjective Answer Questions)

1. ‘व्याघ्रपथिक कथा’ कहाँ से लिया गया है? इसके लेखक कौन है?
उत्तर — ‘व्याघ्र-पथिक कथा’ प्रसिद्ध नीतिकथा ग्रंथ हितोपदेश के ‘मित्रलाभ’ नामक भाग से लिया गया है। हितोपदेश में बालकों के मनोरंजन और नीतिशिक्षा के लिए पशु-पक्षियों से संबंधित अनेक कथाएँ है। इसके लेखक नारायण पंडित है।

2. सोने के कंगन को देखकर पथिक ने क्या सोचा?
उत्तर — सोने के कंगन को देखकर पथिक लोभ में पड़ गया। उसने सोचा कि भाग्य से ही ऐसा अवसर मिलता है। किंतु यहाँ आत्म संदेह की स्थिति में कार्य नहीं करना चाहिए।

3. पथिक को फँसाने के लिए बाघ ने क्या चाल चला?
उत्तर — पथिक लोभी था। परंतु वह कुछ चालाक भी था। उसे कंगन का लालच तो था परन्तु वह बाघ पर विश्वास नहीं कर रहा था। तब पथिक को फँसाने के लिए बाघ ने उससे कहा हे पथिक। युवावस्था में अनेक गायों और मनुष्यों का वध करने के कारण मेरे पुत्र और पत्नी मर गए। तब एक धर्मात्मा ने मुझे दान और धर्म करने का उपदेश दिया है। उनके उपदेश के बाद मैं इस समय स्नानशील, दानी, वृद्ध और गले हुए नख-दंत वाला हूँ। मेरे द्वारा शास्त्र भी पढ़ा गया है। अतः मैं विश्वास का पात्र हूँ।

4. बाघ ने पथिक को अपने दानी होने का विश्वास दिलाने के लिए क्या किया?
उत्तर — बाघ ने पथिक को अपने दानी होने का विश्वास दिलाने के लिए कहा कि युवावस्था में अनेक गायों और मनुष्यों का वध करने के कारण उसके पुत्र और पत्नी मर गए। तब एक धर्मात्मा ने उसे दान करने और धर्म का पालन करने का उपदेश दिया। अब वह स्नान करने वाला, दानी और गले हुए नख-दंत वाला वृद्ध है। उसने शास्त्र का भी अध्ययन किया है। अतः वह विश्वास का पात्र है।

5. बाघ ने स्वयं को अहिंसक सिद्ध करने के लिए क्या तर्क दिया?
उत्तर — बाघ ने स्वयं को अहिंसक सिद्ध करने के लिए यह तर्क दिया कि युवावस्था में वह अति दुराचारी था। अनेक गायों और मनुष्यों के वध करने के कारण वह निःसंतान और पत्नीविहिन हो गया था। तब एक धार्मिक व्यक्ति ने पापमुक्त होने के लिए उसे दान-पुण्य करने का उपदेश दिया। वृद्धावस्था के कारण उसके नाखून और दाँत भी गल गये। अतः अब वह एक अहिंसक प्राणी है। पथिक उसकी बातों में फँस गया।

6. धन और दवा किसे देना उचित है?
उत्तर — धन गरीबों को देना उचित है और दवा रोगियों को देना उचित है क्योंकि धनवानों को धन की आवश्यकता नहीं है। उसी तरह नीरोगी को भी दवा की आवश्यकता नहीं होती है।

7. ‘व्याघ्रपथिक कथा’ के आधार पर बतायें कि सात्विक दान क्या है?
उत्तर — ‘व्याघ्रपथिक कथा’ के अनुसार उचित स्थान पर और उचित समय में उपयुक्त व्यक्ति को दिया गया दान, सात्विक दान कहलाता है। अर्थात समय, स्थान और पात्र को ध्यान में रखकर दिया गया दान सात्विक दान होता है।

8. ‘व्याघ्रपथिक कथा’ के आधार पर बतायें कि दान किसको देना चाहिए?
उत्तर — ‘व्याघ्रपथिक कथा’ के आधार पर दान गरीबों को देना चाहिए। साथ ही दान उसे देना चाहिए जिसने आप पर कोई उपकार नहीं किया हो। उचित स्थान पर और उचित समय में उपयुक्त व्यक्ति को दिया गया दान, सात्विक दान कहलाता है।

9. बाघ के द्वारा पकड़ लिये जाने पर पथिक अपने मन में क्या सोचता है?
उत्तर — बाघ के द्वारा पकड़ लिये जाने पर पथिक अपने मन में सोचता है कि जिस व्यक्ति की इंद्रियाँ और मन उसके स्वयं के नियंत्रण में नहीं हैं, उसका सारी क्रियाएँ हाथी के स्नान जैसा व्यर्थ होता हैं, क्योंकि हाथी पानी में नहाकर अंत में स्वयं के शरीर पर वापस कीचड़ छिड़कता हैं। क्रिया के बिना ज्ञान भार स्वरूप है। अर्थात् अगर व्यवहार में प्रयोग न करें तो कोई भी ज्ञान दुर्भाग्यशाली व्यक्ति द्वारा पहने गए गहने की तरह बोझ बन जाता हैं।

10. बूढ़े बाघ ने पथिक को कैसे मारा ?
उत्तर — बूढ़ा बाघ पथिक से तालाब में स्नान करके सोने का कंगन ले जाने के लिए कहता है। पथिक स्नान करने के लिए जैसे ही तालाब में घुसता है, वह गहरे कीचड़ में फँस जाता है और भागने में असमर्थ हो जाता है। बाघ धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और उसको मारकर खा जाता है।

11. अनिष्ट से इष्ट की प्राप्ति का परिणाम कैसे बुरा होता है ?
उत्तर — अनिष्ट से इष्ट की प्राप्ति का परिणाम इसलिए बुरा होता है, क्योंकि अनिष्ट का अर्थ है अमंगल, अशुभ, या अवांछित, और जब ऐसी नकारात्मक स्थिति से कोई वांछित चीज प्राप्त होती है, तो उसका परिणाम विष मिले अमृत के समान होता है, जो अंततः हानि ही पहुँचाता है या दुखदायी होता है।

12. ‘व्याघ्रपथिककथा’ पाठ से क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर — ‘व्याघ्रपथिककथा’ नारायण पंडित द्वारा रचित एक नीतिकथा है। इस कथा में लोभ के दुष्परिणाम का वर्णन किया गया है। इस पाठ से हमें यही शिक्षा मिलती है कि हमें अधिक लोभ नहीं करनी चाहिए और लोभवश हमें अपनी जान को जोखिम में नहीं डालनी चाहिए।

13. ‘ज्ञानं भारः क्रियां विना’ का अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर — ‘ज्ञानं भारः क्रियां विना’ इसका अर्थ है कि यदि हम किसी भी ज्ञान को व्यवहार में प्रयोग न करें तो वह ज्ञान बोझ स्वरुप होता है। वैसे ज्ञान का हमारे जीवन में कोई महत्व नहीं रह जाता है। अर्थात यदि कोई व्यक्ति अपने ज्ञान को अपने व्यवहारिक जीवन में प्रयोग नहीं कर पाता है तो उसके लिए वह ज्ञान बोझ बन जाता है। ठीक वैसे ही जैसे कि पथिक ने यह जानते हुए कि बाघ एक हिंसक जीव है, फिर भी उसे वह अहिंसक और दानी मान लेने की भूल करता है और बाघ के द्वारा मारा जाता है।

14. ‘ज्ञानं भारः क्रियां विना’ यह उक्ति व्याघ्रपथिक कथा पर कैसे चरितार्थ होती है ?
उत्तर — व्याघ्रपथिक कथा में एक पथिक लोभ के कारण एक बूढ़े बाघ द्वारा पकड़ा जाता है और मारकर खा लिया जाता है। पथिक दो गलतियाँ करता है। पहली कि वह सोने के कंगन के लोभ में पड़ता है और दूसरी कि वह बाघ जैसे हिंसक जानवर को अहिंसक और दानी मान लेता है। पथिक का ज्ञान व्यर्थ रह जाता है। इस प्रकार ‘ज्ञानं भारः क्रियां विना’ यह उक्ति व्याघ्रपथिक कथा पर चरितार्थ होती है।

15. ‘व्याघ्रपथिक कथा’ को संक्षेप में अपने शब्दों में लिखें?
उत्तर — ‘व्याघ्रपथिक कथा’ नारायण पंडित द्वारा रचित एक नीति कथा है। इस कथा में लोभ के दुष्परिणाम का वर्णन किया गया है। इस कथा में एक बूढ़ा बाघ स्नान कर हाथ में सोने का एक कंगन लेकर तालाब के किनारे पुकारता है हो! हो! पथिक! यह सोने का कंगन ले लो। एक लोभी पथिक उसके जाल में फंस जाता है। बाघ उसे स्नान कर सोने का कंगन लेने को कहता है। पथिक स्नान करने के लिए जैसे ही तालाब में घुसता है, वह गहरे कीचड़ में फँस जाता है और भागने में असमर्थ हो जाता है। बाघ धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और उसको मारकर खा जाता है।

– : समाप्त : –

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