Bihar Board Class 10th Chemistry : तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण (Periodic Classification of Elements)

Bihar Board Class 10th Chemistry : प्रिय विद्यार्थियों, “Mindbloom Study” (#1 Online Study Portal For Bihar Board Exams) आपके लिए लाया है Bihar Board Class 10th Chemistry : तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण (Periodic Classification of Elements) का वस्तुनिष्ठ प्रश्न, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ।

MCQ QUESTIONS

1. मेंडलीव के आवर्त नियम के अनुसार, तत्त्वों के गुण आवर्तफलन होते हैं उनके
(A) परमाणु संख्याओं के
(B) परमाणु द्रव्यमानों के
(C) परमाणु आयतन के
(D) घनत्व के

2. आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार, तत्त्वों के गुण आवर्तफलन होते हैं उनके
(क) परमाणु द्रव्यमानों के
(ख) परमाणु संख्याओं के
(ग) परमाणु आकार के
(घ) धातुई गुण के

3. मेंडलीव ने तत्त्वों को निम्नलिखित में किसके बढ़ते हुए क्रम में वर्गीकृत किया?
(क) परमाणु संख्या
(ख) परमाणु द्रव्यमान
(ग) रासायनिक सक्रियता
(घ) घनत्व

4. ‘अष्टक नियम’ के प्रतिपादक थे ?
(क) डाल्टन
(ख) डोबरेनर
(ग) मेंडलीव
(घ) न्यूलैंड्स

5. त्रियक नियम का प्रतिपादन किस वैज्ञानिक ने किया था?
(क) लोथर मेयर
(ख) मेंडलीव
(ग) डोबरेनर
(घ) न्यूलैंड्स

6. आवर्त सारणी के किसी वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर तत्त्व का धातुई गुण
(क) बढ़ता है
(ख) घटता है
(ग) अपरिवर्तित रहता है
(घ) इनमें कोई नहीं

7. परमाणु संख्या, न कि परमाणु द्रव्यमान, तत्त्व का अधिक मौलिक गुण है। इस कथन का प्रतिपादन किसने किया था?
(क) लोथर मेयर
(ख) मोसले
(ग) मेंडलीव
(घ) रदरफोर्ड

8. किसी तत्त्व A के क्लोराइड का सूत्र ACl₂ है। यह यौगिक उच्च द्रवणांकवाला ठोस पदार्थ है। A आवर्त सारणी के उस वर्ग के अंतर्गत होगा जिसमें है
(क) K
(ख) Ba
(ग) B
(घ) Si

9. निम्नलिखित में कौन-सा तत्त्व सबसे अधिक अधातुई गुणवाला है?
(क) N
(ख) Cl
(ग) P
(घ) S

10. सबसे अधिक भास्मिक ऑक्साइड है ?
(क) K₂O
(ख) B2O3
(ग) SO2
(घ) NO2

11. आवर्त सारणी में वर्ग 1 के तत्त्व कहलाते हैं ?
(क) संक्रमण तत्त्व
(ख) क्षारीय मृदा-धातुएँ
(ग) क्षार धातुएँ
(घ) लैंथेनाइड्स

12. मैग्नीशियम आवर्त सारणी के किस वर्ग में है?
(क) वर्ग 1
(ख) वर्ग 2
(ग) वर्ग 12
(घ) वर्ग 13

I. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।

1. आवर्त सारणी के उदग्र स्तंभ …वर्ग.. कहलाते हैं।
2. आवर्त सारणी की क्षैतिज कतारें …आवर्त.. कहलाती हैं।
3. आधुनिक आवर्त सारणी के अनुसार तत्त्वों के गुण उनकी …परमाणु संख्या…. के आवर्तफलन होते हैं।
4. एक तत्त्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है। इस तत्त्व की परमाणु संख्या …17…. है।
5. आवर्त सारणी में आवर्तों की कुल संख्या …7… है।
6. वर्ग 17 के तत्त्वों को …हैलोजन्स… कहते हैं।
7. वर्ग 13 के तत्त्वों की संयोजकता …3… होती है।
8. आवर्त सारणी के प्रथम आवर्त में तत्त्वों की संख्या …2… है।
9. वर्ग 1 और वर्ग 2 के तत्त्वों के ऑक्साइड …भास्मिक… होते हैं।
10. किसी तत्त्व के संयोगी शेल में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताती है कि वह तत्त्व आवर्त सारणी के किस ….वर्ग… में है।

II. सही/गलत का चयन करें।

1. क्लोरीन, ब्रोमीन और आयोडीन डोबरेनर के त्रियक का पालन करते हैं। → सही
2. अष्टक नियम का प्रतिपादन मेंडलीव ने किया था। → गलत
3. आधुनिक आवर्त सारणी में मेंडलीव की आवर्त सारणी के अधिकांश दोष दूर हो गए हैं। → सही
4. किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है। → गलत
5. सोडियम परमाणु का आकार क्लोरीन परमाणु के आकार से छोटा होता है। → गलत
6. किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर तत्त्वों के धातुई गुण बढ़ते जाते हैं। → गलत
7. पोटैशियम के परमाणु की तुलना में ब्रोमीन का परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन का त्याग कर सकता है। → गलत
8. आवर्त सारणी के वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर परमाणुओं के आकार बढ़ते जाते हैं। → सही

SUBJECTIVE ANSWER QUESTIONS

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

1. तत्त्वों के अष्टक नियम का प्रतिपादन किसने किया था?
उत्तर — जॉन न्यूलैंड्स

2. आवर्त सारणी के उदग्र स्तंभ क्या कहलाते हैं?
उत्तर — समूह या वर्ग

3. आवर्त सारणी की क्षैतिज कतारें क्या कहलाती हैं?
उत्तर — आवर्त

4. उस एक तत्त्व का नाम लिखें जिसके आविष्कृत होने के पहले ही मेंडलीव ने उसके गुणों का पूर्वानुमान कर लिया था।
उत्तर — एका-सिलिकॉन (जर्मेनियम)

5. आवर्त सारणी के दीर्घ रूप में कुल कितने वर्ग और आवर्त हैं?
उत्तर — 18 वर्ग और 7 आवर्त

6. एक क्षार धातु और एक क्षारीय मृदा धातु को बताएँ जिनके नाम ‘S’ अक्षर से प्रारंभ होते हैं।
उत्तर — क्षार धातु: सोडियम तथा क्षारीय मृदा धातु: स्ट्रोंशियम

7. वर्ग 14 के एक तत्त्व की परमाण संख्या 14 है। बताएँ कि इस तत्त्व के गुण धातुई होंगे या अधातुई।
उत्तर — यह एक उपधातु (सिलिकॉन) है। इसके गुण धातुई और अधातुई दोनों के बीच के होते हैं।

8. कार्बनवाले वर्ग के अन्य दो तत्त्वों के नाम लिखें।
उत्तर — सिलिकॉन और जर्मेनियम

9. एक तत्त्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है। आवर्त सारणी में इस तत्त्व की वर्ग-संख्या बताएँ।
उत्तर — 17 (हैलोजन समूह)

10. आधुनिक आवर्त सारणी तत्त्वों के किस गुण पर आधारित है?
उत्तर — परमाणु संख्या

11. एक कारण देकर बताएँ कि नाइट्रोजन और फॉस्फोरस को आवर्त सारणी के एक ही वर्ग में क्यों रखा गया है?
उत्तर — इन दोनों तत्त्वों के बाह्यतम कोश में 5 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिस कारण इनके गुण समान होते हैं।

12. किस तत्त्व के परमाणु में पूर्णतः भरे हुए सिर्फ दो शेल हैं?
उत्तर — निऑन (Ne)

13. किसी तत्त्व के समस्थानिकों को आवर्त सारणी के एक ही स्थान में क्यों रखा गया है?
उत्तर — समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान होती है और आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है।

14. मेंडलीव की मूल आवर्त सारणी में किस वर्ग के तत्त्व गायब थे?
उत्तर — अक्रिय गैसों का वर्ग (वर्ग 18)

15. यदि किसी तत्त्व की परमाणु संख्या 1.5 हो, तो क्या आवर्त सारणी में उसे हाइड्रोजन और हीलियम के बीच रखा जा सकता है?
उत्तर — नहीं, क्योंकि परमाणु संख्या हमेशा एक पूर्ण संख्या होती है।

16. आवर्त सारणी में सबसे अधिक धात्विक और सबसे अधिक अधात्त्विक तत्त्व के नाम लिखें।
उत्तर — सबसे अधिक धात्विक तत्त्व: फ्रांसियम (Fr)
सबसे अधिक अधात्त्विक तत्त्व: फ्लोरीन (F)

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. आवर्त सारणी के लघु एवं दीर्घ आवर्त से क्या समझते हैं? आवर्त सारणी के लघु एवं दीर्घ आवर्तों की संख्या बताएँ।
उत्तर — आवर्त सारणी में, जिन आवर्तों में कम तत्त्व होते हैं, उन्हें लघु आवर्त कहते हैं। इनमें पहले आवर्त में 2 और दूसरे-तीसरे आवर्त में 8-8 तत्त्व होते हैं। वहीं, जिन आवर्तों में अधिक तत्त्व होते हैं, उन्हें दीर्घ आवर्त कहते हैं। चौथे, पाँचवें और छठे आवर्त को दीर्घ आवर्त कहा जाता है, जिनमें क्रमशः 18, 18 और 32 तत्त्व होते हैं। सातवाँ आवर्त भी दीर्घ आवर्त की श्रेणी में आता है, हालांकि यह अपूर्ण है। कुल मिलाकर, तीन लघु आवर्त (1, 2 और 3) और चार दीर्घ आवर्त (4, 5, 6 और 7) हैं।

2. आवर्त सारणी के दूसरे आवर्त में आठ ही तत्त्व क्यों रखे गए हैं?
उत्तर — दूसरे आवर्त में, तत्त्वों के परमाणु में दो ऊर्जा स्तर या शेल होते हैं। दूसरे शेल में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन ही रह सकते हैं ( 2n^2 सूत्र के अनुसार, 2 × 2^2 = 8 )। चूँकि प्रत्येक तत्त्व में इलेक्ट्रॉन की संख्या एक-एक करके बढ़ती है और एक ही शेल में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं हो सकते, इसलिए दूसरे आवर्त में केवल 8 तत्त्वों को स्थान दिया गया है। जब 8 इलेक्ट्रॉन हो जाते हैं, तो नया शेल शुरू हो जाता है, जिससे अगला आवर्त शुरू होता है।

3. मेंडलीव की आवर्त सारणी की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख करें।
उत्तर — मेंडलीव की आवर्त सारणी की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं –
i) वर्गीकरण का आधार :- यह तत्त्वों के परमाणु द्रव्यमान पर आधारित थी।
ii) भविष्यवाणी :- मेंडलीव ने कुछ अज्ञात तत्त्वों (जैसे एका-एल्युमिनियम और एका-सिलिकॉन) के गुणों की भविष्यवाणी की और उनके लिए रिक्त स्थान छोड़े।
iii) तुलना :- मेंडलीव ने तत्वों को समान रासायनिक गुणों के आधार पर समूहों में वर्गीकृत किया, जिससे उनके गुणों की तुलना करना आसान हो गया।
iv) संशोधन :- उन्होंने कुछ तत्त्वों के परमाणु द्रव्यमान को संशोधित करने में भी मदद की।

4. मेंडलीव की आवर्त सारणी की किन्हीं दो त्रुटियों का वर्णन करें।
उत्तर — मेंडलीव की आवर्त सारणी की दो प्रमुख त्रुटियाँ थीं –
i) समस्थानिकों की स्थिति :- समस्थानिकों के परमाणु द्रव्यमान अलग-अलग होते हैं, लेकिन उनके रासायनिक गुण समान होते हैं। मेंडलीव की आवर्त सारणी में इन्हें अलग-अलग स्थान नहीं दिया गया, जो उनके वर्गीकरण नियम का उल्लंघन था।
ii) हाइड्रोजन की स्थिति :- हाइड्रोजन के गुण क्षार धातुओं और हैलोजनों दोनों से मिलते-जुलते हैं। इसलिए, उसकी स्थिति निश्चित नहीं थी और उसे आवर्त सारणी में उचित स्थान नहीं मिल पाया।

5. आधुनिक आवर्त सारणी में किसी परमाणु का स्थान उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से किस प्रकार संबंधित है?
उत्तर — आधुनिक आवर्त सारणी में किसी परमाणु का स्थान उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से सीधा संबंधित है।
i) आवर्त संख्या :- परमाणु में जितने शेल (कक्षाएँ) होते हैं, उतनी ही उसकी आवर्त संख्या होती है। उदाहरण के लिए, सोडियम (2, 8, 1) में तीन शेल हैं, इसलिए यह तीसरे आवर्त में है।
ii) वर्ग संख्या :- बाह्यतम शेल में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (संयोजकता इलेक्ट्रॉन) ही वर्ग संख्या निर्धारित करती है। उदाहरण के लिए, सोडियम के बाह्यतम शेल में एक इलेक्ट्रॉन है, इसलिए यह वर्ग 1 में है।

6. निम्नलिखित में कौन-कौन-से तत्त्व रासायनिक दृष्टि से सदृश होंगे और क्यों? इन तत्त्वों की परमाणु संख्याएँ कोष्ठक के अंदर दी गयी हैं।
Na (11), F (9), K (19), P (15), Cs (55)
उत्तर — Na (11), K (19), और Cs (55) रासायनिक दृष्टि से सदृश होंगे।
कारण : इन सभी तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में बाह्यतम शेल में 1 इलेक्ट्रॉन होता है।
i) Na: 2, 8, 1
ii) K: 2, 8, 8, 1
iii) Cs: 2, 8, 18, 18, 8, 1
       समान संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के कारण, ये सभी तत्त्व क्षार-धातु हैं और समान रासायनिक गुण प्रदर्शित करते हैं।

7. सदृश गुणों के कारण फ्लुओरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन और आयोडीन को आवर्त सारणी के एक ही वर्ग में रखा गया है। इनके किन्हीं दो सदृश गुणों का उल्लेख करें।
उत्तर — ये सभी हैलोजन (वर्ग 17) के सदस्य हैं। इनके दो सदृश गुण निम्नलिखित हैं –
i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास :- इन सभी के बाह्यतम शेल में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिससे ये सभी एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर अक्रिय गैस जैसा विन्यास प्राप्त करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
ii) रासायनिक अभिक्रियाशीलता :- ये सभी बहुत अभिक्रियाशील अधातुएँ हैं। ये सभी धातु के साथ आयनिक यौगिक और हाइड्रोजन के साथ सहसंयोजक यौगिक बनाते हैं।

8. क्षार-धातुओं के नाम लिखें। इन्हें आवर्त सारणी के एक ही वर्ग में क्यों रखा गया है?
उत्तर — क्षार-धातुएँ है : लिथियम (Li), सोडियम (Na), पोटैशियम (K), रूबिडियम (Rb), सीजियम (Cs), और फ्रांसियम (Fr)।
   इन्हें एक ही वर्ग (वर्ग 1) में इसलिए रखा गया है क्योंकि इनके बाह्यतम शेल में एक ही संयोजकता इलेक्ट्रॉन होता है। इस एक इलेक्ट्रॉन को आसानी से त्यागकर ये +1 आवेशित आयन बनाते हैं। समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के कारण, ये सभी तत्त्व समान रासायनिक गुणधर्म प्रदर्शित करते हैं।

9. तीसरे आवर्त में सोडियम (Na) से क्लोरीन (CI) की ओर बढ़ने पर परमाणु की त्रिज्या क्यों घटती जाती है?
उत्तर — तीसरे आवर्त में सोडियम (Na) से क्लोरीन (Cl) की ओर जाने पर, परमाणु त्रिज्या घटती जाती है। इसका कारण है कि हम एक ही आवर्त में बाईं से दाईं ओर जा रहे हैं।
i) इलेक्ट्रॉनों की संख्या में वृद्धि :- नाभिक का धनावेश बढ़ता जाता है (सोडियम में 11 प्रोटॉन, क्लोरीन में 17)।
ii) शेल की संख्या समान :- इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने के बावजूद, शेल की संख्या वही (तीन) रहती है।
iii) नाभिकीय आकर्षण बल में वृद्धि :- बढ़ते हुए नाभिकीय आवेश के कारण, बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। इस प्रबल आकर्षण बल के कारण इलेक्ट्रॉन शेल सिकुड़ जाता है, जिससे परमाणु का आकार और त्रिज्या घट जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. तत्त्वों के वर्गीकरण के क्षेत्र में हुए कुछ प्रारंभिक प्रयासों का उल्लेख करें।
उत्तर — तत्त्वों के वर्गीकरण के प्रारंभिक प्रयासों में सबसे पहले डोबेराइनर के त्रिक (1829) शामिल हैं, जिसमें उन्होंने तीन-तीन तत्त्वों के समूह बनाए जिनके रासायनिक गुण समान थे और बीच वाले तत्त्व का परमाणु द्रव्यमान अन्य दो के औसत के बराबर था। इसके बाद न्यूलैंड्स का अष्टक नियम (1866) आया, जिसमें उन्होंने तत्त्वों को उनके बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्थित किया और पाया कि हर आठवें तत्त्व के गुण पहले तत्त्व के समान थे।

2. मेंडलीव का आवर्त नियम क्या है? इसके आधार पर बनायी गयी आवर्त सारणी की रूपरेखा क्या है?
उत्तर — मेंडलीव का आवर्त नियम कहता है कि तत्त्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्तफलन होते हैं। इसके आधार पर बनी आवर्त सारणी में तत्त्वों को उनके बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के क्रम में क्षैतिज पंक्तियों (आवर्त) और समान गुणों वाले तत्त्वों को उदग्र स्तंभों (समूह या वर्ग) में रखा गया। इस सारणी में 8 वर्ग और 7 आवर्त थे, और इसमें कुछ रिक्त स्थान भी छोड़े गए थे।

3. मेंडलीव की आवर्त सारणी से क्या लाभ हैं?
उत्तर — मेंडलीव की आवर्त सारणी के मुख्य लाभ थे –
i) अध्ययन में सुविधा :- तत्त्वों को उनके गुणों के आधार पर वर्गीकृत करने से उनका अध्ययन करना आसान हो गया।
ii) भविष्यवाणी :- उन्होंने कुछ अज्ञात तत्त्वों (जैसे एका-सिलिकॉन) के गुणों का सफलतापूर्वक पूर्वानुमान किया और उनके लिए खाली स्थान छोड़े, जो बाद में सही साबित हुए।
iii) परमाणु द्रव्यमान का संशोधन :- इस सारणी ने कुछ तत्त्वों (जैसे बेरीलियम) के गलत मापे गए परमाणु द्रव्यमान को ठीक करने में मदद की।

4. आधुनिक आवर्त सारणी का उल्लेख करते हुए बताएँ कि इस आधार पर बनी आवर्त सारणी की मुख्य उपयोगिताएँ क्या हैं?
उत्तर — आधुनिक आवर्त सारणी तत्त्वों के परमाणु संख्या पर आधारित है, जिसे मोजले ने प्रतिपादित किया था। इसकी मुख्य उपयोगिताएँ हैं –
i) वर्गीकरण का आधार :- यह एक अधिक तर्कसंगत वर्गीकरण प्रदान करती है, क्योंकि परमाणु संख्या एक मौलिक गुण है।
ii) गुणों का पूर्वानुमान :- किसी तत्त्व के आवर्त और वर्ग संख्या से उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, धात्विकता-अधात्विकता और संयोजकता जैसे गुणों का पूर्वानुमान किया जा सकता है।
iii) अध्ययन में सरलता :- इस सारणी के कारण रासायनिक अभिक्रियाओं और तत्त्वों के गुणों का अध्ययन बहुत व्यवस्थित और सरल हो गया है।

5. किन अर्थों में आधुनिक आवर्त सारणी मेंडलीव की आवर्त सारणी से भिन्न है?
उत्तर — आधुनिक आवर्त सारणी मेंडलीव की सारणी से कई मायनों में भिन्न है –
i) आधार :- आधुनिक सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है, जबकि मेंडलीव की सारणी परमाणु द्रव्यमान पर आधारित थी।
ii) त्रुटियाँ :- आधुनिक सारणी ने हाइड्रोजन की स्थिति, समस्थानिकों और कुछ तत्त्वों के अनुचित क्रम जैसी मेंडलीव की सारणी की त्रुटियों को दूर किया।
iii) अक्रिय गैसें :- आधुनिक सारणी में अक्रिय गैसों के लिए एक अलग समूह (वर्ग 18) है, जो मेंडलीव की मूल सारणी में नहीं था।

6. किसी तत्त्व का आवर्त सारणी में स्थान की सहायता से उसके गुणों का पूर्वानुमान कैसे किया जा सकता है?
उत्तर — किसी तत्त्व के आवर्त और वर्ग संख्या से उसके गुणों का पूर्वानुमान किया जा सकता है।
i) वर्ग संख्या :- वर्ग संख्या से संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या का पता चलता है, जो रासायनिक अभिक्रियाशीलता और संयोजकता को निर्धारित करती है।
ii) आवर्त संख्या :- आवर्त संख्या से परमाणु में उपस्थित शेलों की संख्या का पता चलता है, जो परमाणु के आकार को प्रभावित करती है।
iii) स्थान :- सारणी में तत्त्व की स्थिति (बाएँ या दाएँ) से उसकी धात्विकता या अधात्विकता का पता चलता है। बाएँ तरफ के तत्त्व धात्विक होते हैं, जबकि दाएँ तरफ के तत्त्व अधात्विक।

7. मेंडलीव की आवर्त सारणी के रिक्त स्थानों का क्या महत्त्व है?
उत्तर — मेंडलीव की आवर्त सारणी में छोड़े गए रिक्त स्थानों का बहुत महत्त्व था। उन्होंने इन स्थानों को उन तत्त्वों के लिए छोड़ा था जिनकी खोज उस समय नहीं हुई थी। उन्होंने इन रिक्त स्थानों के लिए ‘एका-बोरॉन’, ‘एका-एल्यूमीनियम’ और ‘एका-सिलिकॉन’ जैसे नाम दिए और उनके गुणों की भविष्यवाणी भी की। जब बाद में स्कैंडियम, गैलियम और जर्मेनियम जैसे तत्त्वों की खोज हुई, तो उनके गुण मेंडलीव की भविष्यवाणी से मेल खाते थे, जिसने उनकी सारणी की विश्वसनीयता को सिद्ध किया।

8. ‘तत्त्वों के गुण उनकी परमाणु संख्या के आवर्तफलन होते हैं’। इस कथन का क्या तात्पर्य है?
उत्तर — इस कथन का तात्पर्य है कि यदि तत्त्वों को उनके बढ़ते परमाणु संख्या के क्रम में व्यवस्थित किया जाए, तो उनके भौतिक और रासायनिक गुणों में एक निश्चित अंतराल के बाद पुनरावृत्ति होती है। आधुनिक आवर्त सारणी इसी सिद्धांत पर आधारित है। उदाहरण के लिए, क्षार धातुएँ (Li, Na, K) या हैलोजन (F, Cl, Br) जैसे समान गुण वाले तत्त्व एक निश्चित अंतराल के बाद एक ही वर्ग में आते हैं।

9. निम्नलिखित पदों की व्याख्या करें –
(a) वर्ग :- आवर्त सारणी में उदग्र स्तंभों को वर्ग या समूह कहते हैं। इनमें रखे गए सभी तत्त्वों के बाह्यतम शेल में समान संख्या में इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिससे उनके रासायनिक गुण समान होते हैं। कुल 18 वर्ग होते हैं।
(b) आवर्त :- आवर्त सारणी में क्षैतिज पंक्तियों को आवर्त कहते हैं। एक आवर्त के सभी तत्त्वों में शेलों की संख्या समान होती है। आवर्त में बाईं से दाईं ओर जाने पर परमाणु संख्या बढ़ती है। कुल 7 आवर्त होते हैं।
(c) सामान्य तत्त्व :- वे तत्त्व जिनके बाह्यतम शेल ही अपूर्ण होते हैं, उन्हें सामान्य या प्रतिनिधि तत्त्व कहते हैं। ये आवर्त सारणी के s-ब्लॉक और p-ब्लॉक के तत्त्व होते हैं, जिनमें वर्ग 1, 2, और 13 से 17 के तत्त्व शामिल हैं।
(d) संक्रमण तत्त्व :- वे तत्त्व जिनके बाह्यतम दो शेल अपूर्ण होते हैं, उन्हें संक्रमण तत्त्व कहते हैं। ये आवर्त सारणी के d-ब्लॉक के तत्त्व हैं, जो वर्ग 3 से 12 तक आते हैं।

10. आवर्त सारणी के वर्ग 1 के तीन तत्त्वों A, B और C की परमाणु त्रिज्याएँ क्रमशः 155 pm, 190 pm और 235 pm हैं। कारण देकर इन तत्त्वों को वर्ग में बढ़ती हुई परमाणु संख्याओं के क्रम में सजाएँ।
उत्तर — वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है, क्योंकि हर नए तत्त्व में एक नया शेल जुड़ता है, जिससे परमाणु का आकार बढ़ जाता है।
यहाँ, परमाणु त्रिज्याएँ हैं –
A: 155 pm
B: 190 pm
C: 235 pm
   चूंकि C की त्रिज्या सबसे अधिक है, वह वर्ग में सबसे नीचे होगा। इसी प्रकार, B बीच में और A सबसे ऊपर होगा।
   अतः, बढ़ती हुई परमाणु संख्याओं के क्रम में ये तत्त्व इस प्रकार व्यवस्थित होंगे: A, B, C।

11. आगे दी गई मेंडलीव आवर्त सारणी के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखें।

(i) उस तत्त्व का नाम लिखें जो
     (क) समूह I तथा आवर्त 3 में है।
     (ख) समूह VII तथा आवर्त 2 में है।

(ii) निम्नलिखित के लिए सूत्र सुझाएँ :
     (क) नाइट्रोजन का ऑक्साइड
     (ख) ऑक्सीजन का हाइड्राइड

(iii) आवर्त सारणी के समूह VIII में कोबाल्ट को, जिसका परमाणु द्रव्यमान 58.93 है, निकेल जिसका परमाणु द्रव्यमान 58.71 है, से पहले क्यों रखा गया है?

(iv) गैलियम के अतिरिक्त उन दो अन्य तत्त्वों के नाम लिखें जिनकी खोज मेंडलीव के अपनी आवर्त सारणी में रिक्त स्थान छोड़ने के बाद हुई।

(v) Li, Na तथा K के परमाणु द्रव्यमानों का उपयोग करके Li तथा K का औसत परमाणु द्रव्यमान ज्ञात करें और इसकी तुलना Na के परमाणु द्रव्यमान से करें। इस क्रियाकलाप द्वारा निकाले गए निष्कर्ष का उल्लेख करें।

अथवा

(i) हम तत्त्वों का वर्गीकरण क्यों करते हैं?
उत्तर — हम तत्त्वों का वर्गीकरण निम्नलिखित कारणों से करते हैं –
a) अध्ययन में सरलता :- ज्ञात तत्त्वों की संख्या बहुत अधिक है। उनका अलग-अलग अध्ययन करना कठिन है। वर्गीकरण से समान गुणों वाले तत्त्वों को एक समूह में रखा जा सकता है, जिससे उनके गुणों का अध्ययन करना आसान हो जाता है।
b) गुणों का पूर्वानुमान :- वर्गीकरण हमें एक समूह के तत्त्वों के गुणों का अध्ययन करके उस समूह के अन्य तत्त्वों के गुणों का पूर्वानुमान लगाने में मदद करता है।
c) व्यवस्थित अध्ययन :- यह रसायन विज्ञान के अध्ययन को अधिक व्यवस्थित और तार्किक बनाता है, जिससे नए यौगिकों और तत्त्वों की खोज में सहायता मिलती है।

(ii) आवर्त सारणी का निर्माण करते समय मेंडलीव द्वारा अपनाए गए दो मापदंड क्या थे?
उत्तर — मेंडलीव ने आवर्त सारणी का निर्माण करते समय दो मुख्य मापदंड अपनाए –
i) परमाणु द्रव्यमान :- उन्होंने तत्त्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्थित किया।
ii) रासायनिक गुणधर्मों की समानता :- उन्होंने समान रासायनिक गुणों वाले तत्त्वों को एक ही ऊर्ध्वाधर स्तंभ (समूह) में रखा। उन्होंने तत्त्वों के हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के साथ बने हाइड्राइड और ऑक्साइड के सूत्रों को आधार बनाया, क्योंकि ये तत्त्व अधिकांश के साथ यौगिक बनाते हैं।

(iii) मेंडलीव ने अपनी आवर्त सारणी में कुछ रिक्त स्थान क्यों छोड़ दिए थे?
उत्तर — मेंडलीव ने अपनी आवर्त सारणी में कुछ रिक्त स्थान इसलिए छोड़ दिए थे क्योंकि उस समय तक कुछ तत्त्वों की खोज नहीं हुई थी, लेकिन वे जानते थे कि भविष्य में ऐसे तत्त्वों की खोज होगी। उन्होंने इन रिक्त स्थानों को ‘एका-बोरॉन’, ‘एका-एल्यूमीनियम’ और ‘एका-सिलिकॉन’ जैसे नाम दिए और उनके गुणों की भविष्यवाणी भी की। जब बाद में इन तत्त्वों की खोज हुई (जैसे गैलियम और जर्मेनियम), तो उनके गुण मेंडलीव की भविष्यवाणी से मेल खाते थे, जिससे उनकी सारणी की प्रामाणिकता सिद्ध हुई।

(iv) मेंडलीव की आवर्त सारणी में हीलियम, निऑन तथा आर्गन जैसी उत्कृष्ट गैसों का उल्लेख क्यों नहीं किया गया था?
उत्तर — मेंडलीव की आवर्त सारणी में उत्कृष्ट गैसों (हीलियम, निऑन, आर्गन) का उल्लेख इसलिए नहीं किया गया था क्योंकि उनकी खोज बहुत बाद में हुई। ये गैसें अक्रियाशील होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे किसी भी अन्य तत्त्व के साथ यौगिक नहीं बनाती हैं। इसी कारण से मेंडलीव के समय तक ये अज्ञात थीं और उनकी सारणी में उनके लिए कोई स्थान नहीं था। बाद में, जब इन गैसों की खोज हुई, तो इन्हें बिना पुरानी सारणी को छेड़े एक नए समूह (वर्ग 18) में रखा गया।

(v) क्या आप क्लोरीन के दो समस्थानिकों Cl-35 तथा Cl-37 को उनके परमाणु द्रव्यमान भिन्न होने के कारण भिन्न-भिन्न स्थानों पर रखना पसंद करेंगे अथवा रासायनिक गुण समान होने के कारण एक ही स्थान पर रखेंगे? अपने उत्तर की पुष्टि करें।
उत्तर — मैं क्लोरीन के दोनों समस्थानिकों Cl-35 और Cl-37 को उनके रासायनिक गुण समान होने के कारण एक ही स्थान पर रखूँगा।
पुष्टि: आधुनिक आवर्त सारणी तत्त्वों के परमाणु संख्या पर आधारित है, न कि परमाणु द्रव्यमान पर। समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान होती है (क्लोरीन के लिए 17), इसलिए उनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास भी समान होता है। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ही रासायनिक गुणों का निर्धारण करता है, इसलिए दोनों समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान होते हैं। आधुनिक आवर्त सारणी में एक ही परमाणु संख्या वाले सभी समस्थानिकों को एक ही स्थान पर रखा जाता है।

12. (i) आवर्त सारणी के आधार पर तत्त्वों के गुणों में आवर्तिता का क्या अर्थ है?
उत्तर — तत्त्वों के गुणों में आवर्तिता का अर्थ है कि जब तत्त्वों को उनके बढ़ते परमाणु संख्या के क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, तो उनके भौतिक और रासायनिक गुणों में एक निश्चित अंतराल के बाद पुनरावृत्ति होती है। यह पुनरावृत्ति इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में समानता के कारण होती है। उदाहरण के लिए, वर्ग 1 (क्षार धातुओं) के सभी तत्त्वों के बाह्यतम शेल में एक इलेक्ट्रॉन होता है, जिसके कारण उनके रासायनिक गुण समान होते हैं और वे एक निश्चित अंतराल के बाद दोहराए जाते हैं।

(ii) एक ही समूह के सभी तत्त्वों के गुण समरूप क्यों होते हैं?
उत्तर — एक ही समूह के सभी तत्त्वों के गुण समरूप होते हैं क्योंकि उनके बाह्यतम शेल में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (संयोजकता इलेक्ट्रॉन) समान होती है। रासायनिक अभिक्रियाएँ मुख्यतः इन संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती हैं। उदाहरण के लिए, वर्ग 1 के सभी तत्त्वों के बाह्यतम शेल में 1 इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए वे सभी आसानी से एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाते हैं। यही कारण है कि उनकी रासायनिक क्रियाशीलता और संयोजकता समान होती है।

(iii) किसी आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर परमाणुओं के इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कैसे परिवर्तित होगी और क्यों ?
उत्तर — किसी आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर परमाणुओं के इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति बढ़ती है।
a) कारण :- जैसे-जैसे हम आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाते हैं, परमाणु संख्या बढ़ती है और नाभिक में धनावेश भी बढ़ता है। जबकि शेलों की संख्या समान रहती है।
b) नाभिकीय आकर्षण :- नाभिक का बढ़ता हुआ धनावेश बाह्यतम शेल के इलेक्ट्रॉनों को अधिक बल से अपनी ओर खींचता है, जिससे परमाणु का आकार घटता है।
c) इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति :- नाभिक का यह प्रबल आकर्षण नए इलेक्ट्रॉन को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता को भी बढ़ाता है, इसलिए तत्त्वों की इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति बढ़ती जाती है और उनकी अधात्विक प्रकृति में भी वृद्धि होती है।

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