भाग-IVA : मूल कर्तव्य (Fundamental Duties)

मूल कर्तव्य (Fundamental Duties)

• मूल कर्तव्य वे नैतिक दायित्व हैं जो भारत के प्रत्येक नागरिक को संविधान द्वारा सौंपे गए हैं। ये नागरिकों को लोकतांत्रिक आचरण और व्यवहार के बुनियादी मानदंडों का पालन करने की याद दिलाते हैं।
• मूल कर्तव्यों को संविधान के भाग IV(A) में अनुच्छेद 51A के अंतर्गत रखा गया है।
• मूल कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में शामिल किया गया था।
• भारतीय संविधान में मूल कर्तव्यों को पूर्व रूसी संविधान से प्रभावित होकर लिया गया है।
• प्रमुख लोकतांत्रिक देशों जैसे अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, आस्ट्रेलिया आदि के संविधानों में नागरिकों के कर्तव्यों को विश्लेषित नहीं किया गया है।
• संभवतः एकमात्र लोकतांत्रिक देश जापान है जिसके संविधान में नागरिकों के कर्तव्य को रखा गया है।
• सामाजिक देशों ने अपने नागरिकों के मूल अधिकारों एवं कर्तव्यों को बराबर महत्व दिया है।
• 1976 में कांग्रेस पार्टी ने सरदार स्वर्ण सिंह समिति का गठन किया जिसे राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान मूल कर्तव्यों, उनकी आवश्यकता आदि के संबंध में संस्तुति देनी थी।
• स्वर्ण सिंह समिति ने संविधान में आठ मूल कर्तव्यों को जोड़ने का सुझाव दिया था लेकिन 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा 10 मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया।
• 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा एक और मूल कर्तव्य को जोड़ा गया।
• मूल कर्तव्य केवल नागरिकों के लिए हैं न कि विदेशियों के लिए।
• निदेशक तत्वों की तरह मूल कर्तव्य गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) है।
• वर्मा समिति 1999 में गठित किया गया था।

मूल कर्तव्यों की आलोचना

i) कर्तव्यों की सूची पूर्ण नहीं है क्योंकि इनमें कुछ अन्य कर्तव्य जैसे – मतदान, कर अदायगी, परिवार नियोजन आदि शामिल नहीं है।
ii) कुछ कर्तव्य अस्पष्ट, बहुअर्थी एवं आम व्यक्ति के लिए समझने में कठिन है। जैसे – “उच्च आदर्श”, “सामासिक संस्कृति”, “वैज्ञानिक दृष्टिकोण” आदि।
iii) मूल कर्तव्य का गैर-न्यायोचित होना।

11 मूल कर्तव्यों की सूची (अनुच्छेद 51A)

• भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह
i) संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे।
ii) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करे।
iii) भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे।
iv) देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे।
v) भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो; ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हैं।
vi) हमारी सामसिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका परिरक्षण करे।
vii) प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करे और उसका संवर्धन करे तथा प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखे।
viii) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे।
ix) सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे।
x) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे जिससे राष्ट्र निरंतर ऊंचाईयों को छूए।
xi) यदि माता-पिता या संरक्षक हैं, तो 6 से 14 वर्ष तक की आयु के अपने बच्चे या प्रतिपाल्य को शिक्षा के अवसर प्रदान करे। इसे 86वें संशोधन, 2002 द्वारा जोड़ा गया है।

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