भाग-II : नागरिकता (Citizenship)
• नागरिकता नागरिक और राज्य के बीच एक कानूनी संबंध होता है। कोई भी देश अपने मूल निवासियों को कुछ विशेष अधिकार देता है इन अधिकारों को ही नागरिकता कहा जाता है। बदले में राज्य नागरिकों से सेवा की अपेक्षा रखता है।
• भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान है अर्थात् हम केवल देश के नागरिक है। राज्यों का नागरिक नहीं बल्कि निवासी है।
Note :- भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान ब्रिटेन से लिया गया है। नागरिकता पर पहला विवरण अरस्तु ने दिया था। नागरिक होने के कारण PAN Card, Aadhar Card दिया जाता है। गैर-नागरिकों को यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
अनुच्छेद 5 :- यह अनुच्छेद संविधान लागू होने के समय भारत की नागरिकता प्राप्त करने की शर्तों की विषय के बारे में जानकारी देता है। इसके तहत संविधान लागू होने के समय अगर कोई व्यक्ति निम्न तीन शर्तों में से कोई भी एक शर्त पूरा करता हो तो उसे भारत का नागरिक माना जाएगा –
i) यदि उसका जन्म भारत में हुआ हो।
ii) यदि उसके माता-पिता में से किसी एक का जन्म भारत में हुआ हो।
iii) संविधान लागू होने के 5 वर्ष पूर्व से भारत में रह रहा हो।
अनुच्छेद 6 :- पाकिस्तान से भारत में आये लोगों का नागरिकता किन्तु यदि वह संविधान बनने के बाद आएंगे तो नागरिकता नहीं मिलेगी। (Permit Rule लागू 19 July, 1948)
अनुच्छेद 7 :- स्वतंत्रता के बाद भारत से पाकिस्तान चले गए ऐसे व्यक्ति जो संविधान बनने से पहले लौट आए तो उन्हें नागरिकता दे दी जाएगी।
Note :- अनुच्छेद-7 में प्रावधान है कि जिस व्यक्ति ने 1 मार्च, 1947 के पश्चात् भारत से पाकिस्तान के लिए प्रवजन कर लिया हो वह भारत का नागरिक नहीं समझा जाएगा। किन्तु, यदि वह स्थायी रूप से भारत लौटने के लिए अनुमति लेकर वापस आ गया है, तो उसकी नागरिकता के संबंध में वही नियम लागू होंगे।
अनुच्छेद 8 :- विदेश भ्रमण एवं नौकरी करने पर भारत की नागरिकता समाप्त नहीं होगी।
अनुच्छेद 9 :- विदेशी नागरिकता लेने पर भारत की नागरिकता समाप्त कर दी जाएगी।
अनुच्छेद 10 :- प्रत्येक व्यक्ति, जो भारत का नागरिक है या समझा जाता है, यदि संसद इस प्रकार के किसी विधान का निर्माण करें। अर्थात भारतीयों की नागरिकता बनी रहेगी तब तक जब तक कि वह कोई देश विरोधी कार्य नहीं करता है।
अनुच्छेद 11 :- नागरिकता संबंधी कानून संसद बनाती है यह जिम्मेदारी गृह मंत्रालय को दी गई है।
नागरिकता अधिनियम (Citizenship Act) – 1955
• यह अधिनियम भारत के संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद को दी गई शक्ति के अनुसार बनाया गया था। यह अधिनियम संविधान के लागू होने के बाद भारतीय नागरिकता प्राप्त करने और समाप्त करने के प्रावधानों को नियंत्रित करता है। यह अधिनियम नागरिकता प्राप्त करने के पाँच तरीके और नागरिकता खोने के तीन तरीके बताता है।
भारत में नागरिकता प्राप्त करने की पाँच विधियाँ
1. जन्म के आधार पर (By Birth) :- संविधान लागू होने के बाद भारत में जन्म लेने वाले सभी बच्चों को नागरिकता दी जाएगी, यदि उनके माता-पिता भारत के नागरिक हो। हम सभी को इसी विधि द्वारा नागरिकता प्राप्त हुई।
अप्रवासी भारतीय (Non-Residential Indian, NRI) → वैसे भारतीय नागरिक जो मूलतः भारत के नागरिक हैं तथा उनके पास भारत का पहचान पत्र, भारत का वीजा इत्यादि है लेकिन व्यवसाय, नौकरी या अन्य सिलसिलों में भारत से बाहर रह रहा हो तो ऐसे नागरिकों को ही NRI को श्रेणी में रखा जाता है। NRI के श्रेणी में जो लोग आते हैं उन्हें समस्त वो अधिकार प्राप्त होते हैं जो अधिकार भारत के आम नागरिकों को प्राप्त होता है। NRI के श्रेणी में आने वाले लोग भारत में सरकारी नौकरी कर सकता है, संवैधानिक पद को प्राप्त कर सकता है, मतदान कर सकता है, शिक्षा ग्रहण कर सकता है इत्यादि।
2. वंश के आधार पर (By Descent) :- विदेश में जन्म लेने वाले बच्चों को भी नागरिकता दी जायेगी। यदि उसके माता-पिता या दोनों में से कोई एक भारत का नागरिक हो। उदाहरण – शिखर धवन का बच्चा, सानिया मिर्जा का बच्चा।
3. पंजीकरण द्वारा (By Registration) :- इस विधि द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को 7 साल लगातार भारत में रहना होता है। इस विधि द्वारा राष्ट्रमंडल देशों को नागरिकता दी जाती है।
4. प्राकृतिक रूप से/देशीकरण (By Naturalization) :– वैसा व्यक्ति जो भारतीय संविधान के 8वीं अनुसूची में से कम-से-कम एक भाषा को जानता हो, भारत के प्रति सकारात्मक सोच रखता हो, वैज्ञानिक या कला में निपुण हो, साथ ही लगातार भारत में 12 साल तक रहा हो, तो उसे देशीकरण विधि द्वारा नागरिकता दी जाती है। उदाहरण – मदर टेरेसा को भारत की नागरिकता।
5. क्षेत्र समाविष्टि द्वारा/अर्जित भूमि (By Incorporation of Territory) :- किसी विदेशी राज्य को भारत में मिला लेने पर वहाँ के लोगों को नागरिकता दे दी जायेगी। उदाहरण – सिक्किम का भारत में विलय होने के बाद वहाँ के निवासी को दी गई नागरिकता। बांग्लादेश के परगना जिले के निवासियों को नागरिकता।
नागरिकता खोने के तीन तरीके
• भारतीय नागरिकता निम्नलिखित तीन तरीकों से समाप्त हो सकती है –
i) त्याग (Renunciation) :- एक वयस्क भारतीय नागरिक स्वेच्छा से अपनी नागरिकता छोड़ने की घोषणा कर सकता है।
ii) समाप्ति/पर्यवसान (Termination) :- यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।
iii) वंचित करना (Deprivation) :- केंद्र सरकार कुछ विशिष्ट आधारों पर (जैसे धोखाधड़ी से नागरिकता प्राप्त करना या संविधान के प्रति अनादर दिखाना) किसी व्यक्ति को नागरिकता से वंचित कर सकती है।
नागरिकता अधिनियम, 1955 में प्रमुख संशोधन
• नागरिकता अधिनियम में अब तक कई बार संशोधन किया गया है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं –
1. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 1986 :- इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य जन्म से नागरिकता (By Birth) के प्रावधानों को सख्त बनाना था। 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद, लेकिन 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्म लेने वाले किसी भी व्यक्ति को जन्म से भारत का नागरिक माना गया। 1 जुलाई 1987 को या उसके बाद भारत में जन्म लेने वाले व्यक्ति को भारत का नागरिक तभी माना जाएगा, जब उसके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक हो। पंजीकरण और देशीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया को भी कठिन बनाया गया।
2. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 1992 :- इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य वंशानुक्रम द्वारा नागरिकता के प्रावधानों में लिंग समानता लाना था। इस संशोधन से पहले, केवल पिता के माध्यम से वंशानुक्रम द्वारा नागरिकता मिल सकती थी। 1992 के संशोधन ने प्रावधान किया कि भारत के बाहर 26 जनवरी 1950 के बाद जन्मे किसी व्यक्ति को नागरिकता मिल सकती है यदि उसके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई भी भारत का नागरिक हो।
3. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2003 :- इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य अवैध प्रवासियों की पहचान करना और दोहरी नागरिकता (Overseas Citizenship of India – OCI) की अवधारणा पेश करना था। 3 दिसंबर 2004 को या उसके बाद भारत में जन्मे व्यक्ति को नागरिकता तभी मिलेगी जब उसके जन्म के समय उसके माता-पिता दोनों भारत के नागरिक हों; या उसके माता-पिता में से एक भारत का नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। ‘कॉमनवेल्थ सिटिजनशिप’ की श्रेणी समाप्त की गई और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) योजना शुरू की गई।
4. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2005 :- इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य OCI योजना का विस्तार करना था। यह संशोधन भारतीय मूल के सभी विदेशी नागरिकों (कुछ देशों को छोड़कर) के लिए OCI के रूप में पंजीकरण की अनुमति देता है। इसने OCI को एक अविभाजित भारतीय नागरिक के रूप में देखा, जिससे वे बिना वीजा के भारत में प्रवेश कर सकते थे और कई आर्थिक और शैक्षणिक लाभ प्राप्त कर सकते थे।
5. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2015 :- इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन (PIO) कार्ड और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड योजनाओं का विलय करना था। PIO कार्ड योजना को OCI कार्ड योजना में मिला दिया गया, जिससे OCI कार्डधारक की श्रेणी बनाई गई, जिसमें PIO कार्डधारकों को भी शामिल किया गया।
6. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) :- इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य छह अल्पसंख्यक समुदायों को नागरिकता के लिए पात्र बनाना था। अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के अवैध प्रवासियों को इस अधिनियम के तहत अवैध नहीं माना जाएगा, बशर्ते वे 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ गए हों। इन समुदायों के लिए देशीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए भारत में निवास की आवश्यक अवधि को 11 साल से घटाकर 5 साल कर दिया गया। यह अधिनियम संविधान की छठी अनुसूची में शामिल आदिवासी क्षेत्रों और इनर लाइन परमिट (ILP) प्रणाली के तहत अधिसूचित क्षेत्रों पर लागू नहीं होता है।
Overseas Citizen of India (OCI)
यह भारत सरकार द्वारा भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को दी जाने वाली एक विशेष स्थिति (Status) है। OCI एक प्रकार की दोहरी नागरिकता नहीं है, लेकिन यह भारत में रहने, काम करने और कई अन्य गतिविधियों के लिए भारतीय नागरिकों के समान अधिकार प्रदान करता है।
• OCI कार्डधारक को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं –
i) वीज़ा-मुक्त यात्रा :- OCI कार्ड एक बहु-प्रवेश (Multiple-entry), बहु-उद्देश्यीय (Multi-purpose) आजीवन वीज़ा है। OCI कार्डधारक को भारत आने के लिए अलग से वीज़ा लेने की आवश्यकता नहीं होती है।
ii) पंजीकरण से छूट :- उन्हें भारत में किसी भी अवधि तक ठहरने के लिए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO) के पास पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है।
iii) आर्थिक, वित्तीय और शैक्षिक समानता :- कुछ विशिष्ट क्षेत्रों को छोड़कर, उन्हें आर्थिक, वित्तीय और शैक्षिक मामलों में अनिवासी भारतीयों (NRIs) के समान अधिकार प्राप्त होते हैं।
iv) पेशेवर स्वतंत्रता :- वे भारत में डॉक्टर, डेंटिस्ट, नर्स, फार्मासिस्ट, वकील, और चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे पेशों का अभ्यास कर सकते हैं।
• OCI कार्डधारक को भारत के नागरिकों के समान सभी अधिकार नहीं मिलते हैं। निम्नलिखित अधिकार उन्हें प्राप्त नहीं होते हैं –
i) उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होता है।
ii) वे संसद या राज्य विधानमंडल के सदस्य नहीं बन सकते।
iii) वे सार्वजनिक रोजगार (Public employment) के लिए पात्र नहीं होते हैं।
iv) वे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसे संवैधानिक पदों को धारण नहीं कर सकते।
v) उन्हें कृषि भूमि या वृक्षारोपण सम्पदा खरीदने की अनुमति नहीं है।
OCI कार्ड के लिए पात्रता
• कोई भी विदेशी नागरिक OCI कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है यदि वह निम्नलिखित शर्तों में से किसी एक को पूरा करता हो –
i) वह 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद भारत का नागरिक था; या
ii) वह 26 जनवरी 1950 को नागरिक बनने के योग्य था; या
iii) वह उस क्षेत्र से संबंधित था जो 15 अगस्त 1947 के बाद भारत का हिस्सा बन गया था; या
iv) वह उपरोक्त पात्र व्यक्ति का बच्चा या पोता-पोती/परपोता-परपोती हो।
v) वह किसी भारतीय नागरिक का विदेशी मूल का पति/पत्नी हो, या किसी OCI कार्डधारक का विदेशी मूल का पति/पत्नी हो (बशर्ते उनकी शादी को कम से कम दो साल हो गए हों)।
अपवाद :- पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिक OCI कार्ड के लिए पात्र नहीं हैं।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens)
• NRC वह रजिस्टर है जिसमें सभी भारतीय नागरिकों का विवरण शामिल होता है। इसका उद्देश्य भारत के वास्तविक (वैध) नागरिकों की पहचान करना और उन्हें अवैध प्रवासियों से अलग करना है।
इसका कानूनी आधार नागरिकता अधिनियम, 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र) नियम, 2003 है। इसमें केवल भारतीय नागरिकों के नाम शामिल होते हैं। अब तक, NRC केवल असम राज्य में लागू किया गया है। असम में इसे अवैध अप्रवास की समस्या के कारण, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर, 25 मार्च 1971 की कट-ऑफ तारीख के आधार पर अपडेट किया गया था।
राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register)
• NPR देश के सभी सामान्य निवासियों (General Residents) का एक रजिस्टर है, भले ही वे नागरिक हों या न हों। इसका उद्देश्य देश में रहने वाले लोगों की पहचान संबंधी एक व्यापक डेटाबेस बनाना। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं को लक्षित लाभार्थियों तक पहुँचाना और देश की सुरक्षा में सुधार करना है। इसका भी कानूनी आधार नागरिकता अधिनियम, 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र) नियम, 2003 के प्रावधानों के तहत ही निर्धारित है। इसमें ‘सामान्य निवासी’ की परिभाषा इस प्रकार दी गई है – “एक व्यक्ति जो पिछले 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहता है या अगले 6 महीने या उससे अधिक समय तक उस क्षेत्र में निवास करने का इरादा रखता है।” इसमें सामान्य जनसांख्यिकीय जानकारी (नाम, पता, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, शैक्षिक योग्यता, व्यवसाय, आदि) एकत्र की जाती है। NPR पहली बार 2010 में तैयार किया गया था और 2015 में अपडेट किया गया।
Some Important Points
• 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका की यात्रा से भारत लौटकर आने के उपलक्ष्य में इस तिथि को ‘प्रवासी भारतीय दिवस’ मनाया जाता है। इसकी सिफारिश डॉ. एल. एम. सिंधवी की अध्यक्षता में की गई थी।
• VISA :- किसी दूसरे देश में जाने के लिए अनुमति की आवश्यकता होती है। इस अनुमति को ही VISA कहते हैं। बिना VISA के किसी दूसरे देश में प्रवेश नहीं कर सकते।
• PASSPORT :- अपने देश को छोड़कर दूसरे देश में जाने के लिए खुद अपने देश से अनुमति लेनी पड़ती है। जिसे Passport कहते हैं।
• Ambassador (राजदूत) :- प्रत्येक देश अपने देश के एक अधिकारी को दूसरे देश में राजनीतिक संबंध बनाने के लिए रखता है। कोई भी देश किसी दूसरे देश के राजदूत पर पुलिस कार्यवाही, गिरफ्तारी या मुकदमा नहीं चला सकता। यह व्यवस्था वियना समझौता के तहत किया गया।
• राष्ट्रमंडल देशों के राजदूतों को उच्चायुक्त (High Commission) कहा जाता है।
• राष्ट्रमंडल (Commonwealth of Nations) एक स्वैच्छिक राजनीतिक संगठन है जिसमें 56 स्वतंत्र और समान सदस्य देश शामिल हैं। ये सभी देश कभी न कभी ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन रहे थे। इसका मुख्यालय लंदन, यूनाइटेड किंगडम में स्थित है। यूनाइटेड किंगडम के राजा या रानी (वर्तमान में किंग चार्ल्स III) राष्ट्रमंडल के औपचारिक प्रमुख होते हैं। यह भूमिका प्रतीकात्मक है और इसमें कोई कार्यकारी शक्ति शामिल नहीं है।
Note :- अमेरिका, ब्रिटेन का गुलाम था, किंतु अमेरिका ने राष्ट्रमंडल की सदस्यता नहीं ली है।
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